माँ "हिंदी "हमारा अभिमान

 📝 माँ "हिंदी "हमारा अभिमान...♥️




भारत माता  के तेजस्वी मस्तक पर
सजी जैसे कोई दमकती
बिंदी है
पूर्ण ह्रदय से स्वीकार करो
सबको जोड़ने वाली यह भाषा हिंदी है...


लिखा है इस भाषा को जैसे
उसी अंदाज में बोला जाता है
सम्मान करती है भावनाओं का
उनकी आत्मा को नही तोला जाता है...


सौम्य है और सरल है यह
अनेक "फूलों के चमन "की भांति है
विविधता में एकता का दर्शन है
अथाह शब्द  खुद में समाती है...


व्यापक प्रसार है जगत में इसका
अभिव्यक्तियों की गज़ब भरमार है
योग किया इसने मानवता के हित में
नही सिखाया कभी अत्याचार है...


जनमानस की वाणी है यह
स्वदेशी और स्वराज की पहचान है
जिस भाषा से ख़ुद को समझना सीखा
जननी तुल्य उसका स्थान है...


सम्प्रेषण होता सहज इससे
और सुगम सा संचार होता है
जो बालक माता कि गोद में पलते
उन्हें अपनी माँ से बहुत प्यार होता है...


मात्र एक भाषा नही यह
बल्कि हमारी "मातृभाषा " है
निराशा का निराकरण इसीसे सीखा
बिखरे जीवन की यह आशा है..


"नित्य नूतन "होना  है इसकीं आदत
समाज की चेतना का विस्तार भी है
भावनाएं जब हमारी अभिव्यक्त होती
माँ हिंदी ही शब्द रूपी देह आधार भी है...


खिलाफत अंग्रेजी कि मैं करता नही
मगर हिंदी का "भरपूर समर्थक"  हूँ
आधुनिक होना मुझें भी भाता है
मगर माँ हिंदी बिना निरर्थक हूँ...✅


अगर थोड़ा पढ़े और लिखे  हम हिंदी
"हस्ताक्षर "में भी जब सम्मान होगा
खुद ही जगमग होगी निज भाषा
और हिंदी पर जग को गुमान होगा...


तड़क भड़क का यह प्रतीक नही
शांत और सरल जीवन की निशानी है
मरने वाले मरते है विदेशी शब्दो पर
रग रग हमारी  हिंदी की दीवानी है...


"संयुक्त राष्ट्र सभा" मे इसका परचम
मजबूत "अटल" ने लहराया है
दुनिया भी आज सीखना चाहती इसको
फिर तेरा ह्रदय क्यों शरमाया है...?🤔


आजीवन करूँ मैं सेवा माँ हिंदी की
इसी रूप में जीवन से गुजरना चाहता हूं
सिकन्दर निकलता है दुनिया जीतने को
लेकिन हिंदी शब्दों से अपने
मैं जग के दिल मे उतरना चाहता हूं...


सामंजस्य में "सक्षम और समर्थ" है भाषा हिंदी
विश्व में  इसकी अब गज़ब पहचान है
गर्व से कहो हम है "हिंदी भाषी"


माँ हिंदी "हमारा अभिमान" है...!🇮🇳
माँ हिंदी "हमारा अभिमान
" है...!🇮🇳




धन्यवाद😊
माध्यम:(रौशन राज .



🏅शिक्षा:- प्यारे साथियों भाषा की अपनी एक ताकत होती है, सम्प्रेषण का वह माध्यम होती है और समाज को जोड़ने का वह कार्य करती है। गाँधीजी का यह विचार था कि हिंदी जनमानस की भाषा है, इसे राष्ट्र की भाषा के रूप में स्वीकार करना चाहिये।
आज "विश्व मंच पर हिंदी भारत की पहचान" है।  साथ ही साथ यह हमारे जीवन के मूल्यों की "परिचायक व संस्कृति की संवाहक" भी है।
अतः इस वैश्वीकरण के युग मे Global  communication के लिये English को सीखने के साथ साथ ,हमें अपनी हिंदी भाषा का भी खुलकर प्रयोग करना चाहिये। क्योंकि "
निज भाषा की उन्नति ही सब उन्नतियों का मूल" है...

अतः एक व्यक्ति तक यह कविता अवश्य प्रसारित करें
...यह माँ हिंदी की सेवा है...


                      🏐🏐🏐

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