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बिहार मतलब ❣️ हमारा

 चाणक्य की नीति हूँ ,  आर्यभट्ट का आविष्कार हूँ मैं ।  महावीर की तपस्या हूँ ,  बुद्ध का अवतार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।  सीता की भूमि हूँ ,  विद्यापति का संसार हूँ मैं।  जनक की नगरी हूँ,  माँ गंगा का श्रंगार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।  चंद्रगुप्त का साहस हूँ ,  अशोक की तलवार हूँ मैं।  बिंदुसार का शासन हूँ ,  मगध का आकार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।  दिनकर की कविता हूँ,  रेणु का सार हूँ मैं।  नालंदा का ज्ञान हूँ,  पर्वत मन्धार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।  वाल्मिकी की रामायण हूँ,  मिथिला का संस्कार हूँ मैं  पाणिनी का व्याकरण हूँ ,  ज्ञान का भण्डार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।  राजेन्द्र का सपना हूँ,  गांधी की हुंकार हूँ मैं।  गोविंद सिंह का तेज हूँ ,  कुंवर सिंह की ललकार हूँ मैं।  अजी हाँ! बिहार हूँ मैं।।  प्यार कि निशानी हुंँ, हांँ मैं दशरथ मांझी हुँ ! अजी हाँ ! बिहार हुँ मैं ...!!      ...

Poem: क्या तुम जानते हो ?

 क्या तुम जानते हो पुरुष से भिन्न एक स्त्री का एकांत? घर, प्रेम और जाति से अलग एक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीन के बारे में बता सकते हो तुम? बता सकते हो सदियों से अपना घर तलाशती एक बेचैन स्त्री को उसके घर का पता? क्या तुम जानते हो अपनी कल्पना में किस तरह एक ही समय में स्वयं को स्थापित और निर्वासित करती है एक स्त्री? सपनों में भागती एक स्त्री का पीछा करते कभी देखा है तुमने उसे रिश्तों के कुरुक्षेत्र में अपने आपसे तड़ते? तन के भूगोल से परे एक स्त्री के मन की गाँठें खोल कर कभी पढ़ा है तुमने उसके भीतर का खौलता इतिहास? पढ़ा है कभी उसकी चुप्पी की दहलीज़ पर बैठ शब्दों की प्रतीक्षा में उसके चेहरे को? उसके अंदर वंशबीज बाते क्या तुमने कभी महसूसा है उसकी फैलती जड़ों को अपने भीतर? क्या तुम जानते हो एक स्त्री के समस्त रिश्ते का व्याकरण? बता सकते हो तुम एक स्त्री को स्त्री-दृष्टि से देखते उसके स्त्रीत्व की परिभाषा? अगर नहीं! तो फिर जानते क्या हो तुम रसोई और बिस्तर के गणित से परे एक स्त्री के बारे में...? - रौशन राज  (कविता - क्या तुम जानते हो) Thank you 😊 

मेरे हमसफ़र

 सुनो.... हमसफ़र नहीं हो तुम फिर भी कहीं न कहीं सफर कर रहे हो तुम मेरे साथ हमेशा ।   कभी बर्फीली पहाड़ियों पर, कभी आसमान की बुलंदियों पर, कभी मेरे सामने बैठे हो..... तो कभी दूर खड़े मुस्करा रहे हो ।  कभी दुनिया की भीड़ में , कभी रात की तनहाई में.....  कभी मेरी यादों में, कभी मेरे ख्यालों में । सुनो.... मेरे साथ न होकर भी हर वक्त मेरे ज़हन में हो तुम मेरे हमसफ़र बनकर ...!!             ✍️ @raushan_raaz

The Poem: 16 श्रृंगार हुँ मैं....

 📝The Poem: 16 श्रृंगार हूँ मैं... तलवारो की धार हूँ मैं हाँ 16 श्रृंगार हूँ मैं विषयी वासना से छूना नही मुझको वरना तेरी चिता का "अंगार" हूँ मैं.... जहाँ भी भी वंदन है मेरा  वहां खुशियों का त्योंहार हूँ मैं वरना अस्तित्व मिटा दूँ पापी का ऐसी अत्यंत "खूँखार" हूँ मैं... अर्धांगिनी रूप में तुझे पूर्णता देने वाले  उस शुभ मिलन का "इंतज़ार" हूँ मैं चरित्र का सामर्थ्य ही मुझे पाता है सदा उसको समर्पित सच्चा "प्यार" हूँ मैं... सिर्फ चंद्रमा की शीतलता नही दहकते सूरज की धधकती बौछार हूँ मैं ममता  करुणा और त्याग समर्पण क्या है इन सबका  ही तो "सार" हूँ मैं... आकाश से भी अधिक ऊंची और  महासागर से भी अधिक विस्तार हूँ मैं बलात्कारी और कुटिल भोगी भाते नही मुझको उन नीच दुष्टों का "संहार" हूँ मैं... हाँ सिंह पर सवार हूँ मैं हवाओ से भी तीव्र रफ्तार हूँ मैं जब प्यार और सम्मान से मुझे जीतोगे तभी तुम्हारे लिये खुशियों की भरमार हूँ मैं... माँ बेटी बहन और भाभी रूप में हर घर मे अनेक "प्रकार" हूँ मैं मूल में हूँ शक्ति का विराट अंश ही अपनी कोख मे...

चीजों में कुछ चीजें ✍️

 चीज़ों में कुछ चीज़ें  बातों में कुछ बातें वो होंगी  जिन्हें कभी देख नहीं पाओगे  इक्कीसवीं सदी में  ढूँढ़ते रह जाओगे  बच्चों में बचपन  जवानों में यौवन  शीशों में दरपन  जीवन में सावन  गाँव में अखाड़ा  शहर में सिंघाड़ा  टेबल की जगह पहाड़ा  और पाजामे में नाड़ा  ढूँढ़ते रह जाओगे  आँखों में पानी  दादी की कहानी  प्यार के दो पल  नल-नल में जल  संतों की बानी  कर्ण जैसा दानी  घर में मेहमान  मनुष्यता का सम्मान  पड़ोस की पहचान  रसिकों के कान  ब्रज का फाग  आग में आग  तराजू पे बट्टा  और लड़कियों का दुपट्टा  ढूँढ़ते रह जाओगे  भरत-सा भाई  लक्ष्मण-सा अनुयायी  चूड़ी-भरी कलाई  शादी में शहनाई  बुराई की बुराई  सच में सच्चाई  मंच पर कविताई  ग़रीब को खोली  आँगन में रंगोली  परोपकारी बंदे  और अर्थी को कंधे  ढूँढ़ते रह जाओगे  अध्यापक, जो सचमुच पढ़ाए  अफ़सर, जो रिश्वत न खाए  बुद्धिजीवी, जो राह दि...

मैंने तो चलना सिख लिया

 मैंने तो अब चलना सीख लिया ❤️✨ मैंने खुद से मिलना सीख लिया  प्यार भरी  बाते करना शुरू किया  यही तो प्रमाण है की मैंने तो अब चलना सीख लिया चोट खाकर दुःख तो  अब भी होता है तमाशा करने के लिये  दिल अब न रोता है मैंने आंसू पीना सीख लिया हां यही सच है मैंने तो अब चलना सीख लिया✨ लक्ष्य से भटकने का  मलाल तो होता है मायूस होता है दिल  ये हाल भी होता है पर खुद की तकलीफें सहना  सीख लिया हा यह सच है मैने तो अब चलना सीख लिया✨ निराशा आती तो है पर उसे रुकना होता है आशा के सूरज को  फिर उगना होता है कुछ ऐसे ही अल्फाज़ो में दर्द को दवा बनाना सीख लिया हा ये सच है, मैंने तो अब चलना सीख लिया❤️✨ ज़िद्दी हूँ न ,ज़िद पवित्रता की कैसे छोड़ सकता हूँ दलदल में भी कमल का सपना कैसे तोड़ सकता हूँ पर थोड़ा धीरज रखना भी  सीख लिया हा बाबा अब  मैंने तो चलना सीख लिया❤️✨ नही अब गिरकर हताश होता हूँ,, उठकर फिर नया प्रयास करता हूँ अब डर को हराना सीख लिया यही तो सच है मैंने तो अब चलना सीख लिया✅ रूठता हूँ मगर न नाराज़ होता हूँ, करता हूँ बादे और खुद का हमराज़ होता हूँ अब मैंने ...

आज कि प्रेरणा

 नाप डालो शोक का विस्तार जितना है,  तोल दो अवमानना का भार जितना है.. पर्वतों को ठेलकर अब साथ ले चलो.. दो दिखा कि धमनियों में ज्वार कितना है! है नहीं किसका हृदय अवसाद में डूबा... कौन है जिसपर समय का कोप न टूटा, अब उठा लो अंजलि में और पी जाओ,  उगल रखा समय ने अंगार जितना है ! कर रहा विपद प्रमाणित, के हलक में प्राण हैं,  और तेज साक्ष्य है कि रक्त में उफान है...  विफलताएं कह रहीं के विजय अब भी दूर है,  झेल जाओ वज्र सा प्रहार जितना है! है वही कायर कि जो, मरता मृतक के साथ है,  शोक-संग्रह करके बढ़ना ही मनुज के हाथ है...  एक पंथ साध कर बढ़ते रहो प्रवाह में,  भूल जाओ कौन खाता खार कितना है ! जन्म है भेंट भी, जन्म ही दायित्व भी...  जन्म ही है सेवा भाव, जन्म ही नेतृत्व भी,  जन्म है अवसर, धरा को निहाल कर डालो..  दो दिखा कि हृदय का आभार कितना है श्रृंखलाएं जोड़ दो, तोड़ डालो रुढि - जाल,  पोंछ डालो लांछनों को, धवल कर दो कुल-कपाल..  शीघ्र सुच्य कर डालो संकटो को आज ही,  कर लिया तुमने ग्रहण, प्रभार जितना है ! तम के सागर में जलाओ, नि...

प्रेरणादायक कहानी

 .  ☀️'प्रेरणादायक कहानी- ध्यान से पढ़िए'☀️ ______________________________________ बहुत पहले आप ने एक चिड़िया की कहानी सुनी होगी..जिसका एक दाना पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था. चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था... हार कर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा... भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था..फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और पेड़ दाना नहीं दे रहा... राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है। चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी... वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना,क्योंकि राजा बढ़ई को सजा नहीं देता..बढ़ई पेड़ नहीं काटता...पेड़ उसका दाना नहीं देता..महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया... चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि...

नारी तुम अबला नहीं

 "नारी तुम अबला नहीं हो" करुणा कि सागर को धार बना के तुम भी लहरों सी हुंकार भरो। अबला नहीं हो तुम नारी इस बात का अभिमान करो।   दिखाए कोई आंख अगर तो न तुम सहम सी जाना। चाहे पकड़े कोई हाथ तुम्हारा न डर कर तुम चुप रह जाना।   उठो लड़ो और आगे बढ़ो अपनी समस्याओं का खुद समाधान बनो। अबला नहीं हो तुम नारी इस बात का अभिमान करो। ___@raushan__raaz

सबसे भारी क्या हैं ?

 सबसे भारी क्या है ? पर्वत पहाड़ या दर्द से भारी मन, नहीं ! सबसे भारी है माथे का वो घूंघट जिसमें संस्करों के नाम पर पिघल जाती है कितनी ही कलाएँ,योग्यताएं और प्रतिभा । सबसे ऊंचा क्या है ? गगन चुम्बी ईमारतें,चीन की दिवार या महापुरुषों की प्रतिष्ठा , नहीं ! सबसे ऊंची होती है वो दहलीज जिसे पार करने में खप जाता है किसी स्त्री का पूरा जीवन जिसके नीचे रह जाती है  कितनी ही सर्वश्रेष्ठ धावक, जो दौड़ कर दहलीज तक  पार नहीं कर पाती। सबसे उजला क्या है? नेताजी की कमीज , दोपहरी का तड़का  या सत्य और ईमान , नहीं ! सबसे उजला होता है  विधवा का दामन  जिसकी चकाचौंध में आँखें मलती कितनी ही स्त्रिया कभी नहीं देख पाती प्रकाश का परावर्तन, वो सतरंगी आँखे ओढ़ कर श्वेत खादी हो जाती है रंग हीन उजली और सफेद। सबसे नुकीला क्या है? हथियार , देवी का त्रिशूल या तिरस्कार और टीस , नहीं ! सबसे नुकीला होता है वो स्पर्श जो होता है इच्छा के विरुद्ध वो स्पर्ष जो खा जाता हैं हृदय की सारी कोमलता जो निगल जाता है साहस  और कराता है आभास  पुरुष प्रधान समाज में स्त्री होने का। - @raushan__raaz

छिप छिप कर अश्रु बहाने वालों

 छिप-छिप अश्रु बहाने वालो !  मोती व्यर्थ बहाने वालो ! कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है? नयन सेज पर सोया हुआ आँख का पानी, और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नींद जवानी गीली उमर बनाने वालो। डूबे बिना नहाने वालो ! कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है।  माला बिखर गयी तो क्या है ख़ुद ही हल हो गई समस्या, आँसू गर नीलाम हुए तो समझो पूरी हुई तपस्या, रूठे दिवस मनाने वालो ! फटी कमीज़ सिलाने वालो ! कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।  खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर केवल जिल्द बदलती पोथी । जैसे रात उतार चाँदनी पहने सुबह धूप की धोती वस्त्र बदलकर आने वालो ! चाल बदलकर जाने वालो ! चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है। लाखों बार गगरियाँ फूटीं शिकन न आई पनघट पर लाखों बार किश्तियाँ डूबीं चहल-पहल वो ही है तट पर तम की उमर बढ़ाने वालो लौ की आयु घटाने वालो लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है। लूट लिया माली ने उपवन लुटी न लेकिन गन्ध फूल की, तूफ़ानों तक ने छेड़ा पर खिड़की बन्द न हुई धूल की, नफ़रत गले लगाने वालो ! सब पर धूल उड़ाने वालो !...

सुप्रभात

 सुप्रभात 🙏 एक फटी धोती और फटी कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी पर बैठा देख एक वेटर ने उनके सामने दो गिलास साफ ठंडे पानी के रख दिए और पूछा- आपके लिए क्या लाना है?  उस व्यक्ति ने कहा- "मैंने मेरी बेटी को वादा किया था कि यदि तुम कक्षा दस में जिले में प्रथम आओगी तो मैं तुम्हे शहर के सबसे बड़े होटल में एक डोसा खिलाऊंगा। इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक डोसा ले आओ।"वेटर ने पूछा- "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा-"मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।"पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बता कर कहा-"मैं इन दोनो को भर पेट नास्ता कराना चाहता हूँ।अभी मेरे पास पैसे नहीं है,इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलेरी से काट लेना।"मालिक ने कहा- "आज हम होटल की तरफ से इस होनहार बेटी की सफलता की पार्टी देंगे।"  होटलवालों ने एक टेबल को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहको के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया।मालिक ने उन्हे एक बड़े थैले में तीन डो...

क्रोध

 एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से। तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !" पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही। धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई। एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।" पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?" पत्नी ने कहा,"नहीं जी" पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा...

सच्चा सुकुन

 #सुकून .....  शहर की बहुत बडी मिठाई पकौड़ों की दुकान थी जिसके ब्रेड पकौड़े और समोसे बडे मशहूर थे ... मैं पहले भी उस दुकान की तारीफें सुन चुका था मगर कल जब एक खास दोस्त ने कहा- दीपकभाई..... क्या स्वादिष्ट थे समोसे ... .. और इतने बढिया मुलायम ब्रेड पकौड़े ... .. वाह मजा ही आ गया ..... सो आज मैंने भी वहां जाकर उन लजीज समोसों और ब्रेड पकौडों का मजा लेने की सोची..... आफिस से निकला तो 7 बज चुके थे सोचा आज उसी दुकान पर पहले कुछ खाया जाए फिर घर जाऊंगा ... मगर जैसे ही दुकान के बाहर गाडी खडी करके अंदर जाने को हुआ तो एक नन्हे से हाथों के स्पर्श ने मेरा ध्यान खींचा देखा तो एक छोटी सी बच्ची 8 से 10 साल के बीच की ने मुझे रोककर कहा-अंकल ... क्या आप भी यहां समोसा और पकौड़ा खाने आए हैं ...  मैंने कहा-हां.... मगर तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो ... क्या यहां अच्छे नहीं मिलते .... वो बडी मासूमियत से बोली-मिलते हैं ना बहुत अच्छे मिलते हैं पर आप मत जाओ उन्हें खाने... मैं...

माँ

 शीर्षक - मां मां एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही एक सुकून सा मिलता है सारी तकलीफे,परेशानियां, दुःख दर्द तो जैसे छूमंतर हो जाता है.... भगवान हर जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने मां को बनाया है 😍 जो बिना कहे आपकी सारी बातें समझ जाती है जिसकी डाट में भी उसका प्यार छिपा हुआ है 😅  मां के लिए किया लिखूं शब्द नहीं है मेरे पास मां की महिमा अनंत है 🙂 थैंक यू मां मुझे इस दुनिया में लाने के लिए... मेरी हर नादानी को भुलाकर मुझे प्यार करने के लिए, बिना कहे मेरी हर बात समझने के लिए...... शुक्रिया मां!!!🥺 मेरी प्यारी मां तुम कितनी अच्छी हो न तुम्हें खुद भी नहीं पता 😍🥰🥰  You are the best ❤️ LOVE YOU MAA😘 सर पर जो हाथ फेरे तो हिम्मत मिल जाये, माँ एक बार मुस्कुरा दे तो जन्नत मिल जाये। वो लिखा के लाई है किस्मत में जागना, माँ कैसे सो सकेगी कि बेटा सफ़र में है। उसको जब भी देखती हूँ मेरी मन्नत पूरी हो जाती है उसमे, उससे, उसपर, ही मेरी दुनिया शुरू और पूरी हो जाती है। दुनिया भाग रही है जन्नत पाने को कोई बताये उन्हें माँ घर पर ही है। 🥰  By __@raushan_raaz

पापा

 पापा 🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹🔹 पापा मेरे सपने अधूरे है पर मैने हिम्मत भी तो नहीं हारी है।। मेरे सपनो को पाने का सफर जारी है पर आपका साथ होता तो बात ओर होती हां ! दिल से कामयाब देखना चाहते हो आप मुझे । पर एक बार कह देते तो बात कुछ और होती मंजिल भी होगी कदमों में मेरे एक दिन पर आपका साथ होता तो बात कुछ ओर होती।। सिखाया आपने ही है कभी हिम्मत मत हारना तो कैसे हार मान लूंगी मै इतनी जल्दी ही।। आपके संस्कारों को कभी नहीं लजाऊगी आप सपने बड़े देखना पूरा करके मैं दिखलाऊंगी।। आपका विश्वास हो इस सफर में तो इसे अंजाम तक पहुंचा दूंगी ।। लोगों को हसने दो मेरी नाकामयाबियों पर मैं उन्हे कामयाब होकर दिखा दूंगी पापा आप मेरी दुनिया हो ओर में ये अभी कह नहीं सकती अफसर बन जाऊंगी  पहला सैल्यूट आपके नाम का होगा।। Love you PAPA❤️ I am proud of u so much....!! अब ओर इंतजार नहीं करवाऊंगी आपको....!! ✍By:- raushan__raaz

Motivation

 MOTIVATION✍  जब आप से पढाई ना हो और मन नही लगे तो एक बार इसे पढ़ लेना शायद पढाई होने लगे ............. आज मायूस है तू आज डरा हुआ है तू आखिर क्या मायूस होना जीत है क्या डर के खामोस बैठ जाना जीत है अरे तू कभी ख़ुद्दार हुआ करता था अरे तू कभी रातो पढ़ा करता था फिर आज ये डर कैसा, ये मायूसी कैसी? क्या भूल गया वो पल जब तूने घर से बैग उठाया था क्या बोला था दोस्त को ,क्या बोला था जलने वालो लोगो को अरे उस वक्त को याद कर जब तू अलग था, अरे वो वक्त याद कर जब तू ट्रेन में बैठा था, अरे उस मुसाफिर को याद कर जिसे ias बनने की ट्रेन में बोला था, याद आ गये ना वो दिन जब सपनों को इज्जत माना जाता था, याद आ गये ना वो दिन जब दोस्त को पढाई के बहाने ना बोला जाता था याद कर वो दिन जब अकेले में किसी को कहा था की ias बनूंगा, क्यों चुप है अब, क्यों सोया है अब , अरे दो दिन में पहाड़ नही उखड़ते अरे अपनी आत्मा को जगा,, अपनी शक्ति को पहचान,, मेरे दोस्त तू ही एक है जो तेरे सपने पूरे कर पायेगा कोई और नही याद कर उस मजदूर को जिसे रोटी नही मिलती, याद कर उस बच्चे को जिसकी जिन्दगी प्लेटफार्म पर पलती अरे याद कर उस दिन को जब...

सर्दी का स्वागत

 सर्दी का स्वागत कुछ इस तरह से,  एक बाल कविता का प्रयास   .................................  मफलर झूमे तनी रजाई।  दाँत बजाती सर्दी आई। दिन छोटे हो गये सिकुड़ के,  बढ़ गयी राते की लंबाई। पिताश्री ने कोट खरीदा,  मम्मी जी ने शॉल मँगाई। दीदी जी की नई सहेली,  बनकर आई ऊन शलाई,। पूंछ दबाये टॉमी बैठा,  थर-थर काँपे चूहे भाई । घर के बाहर जैसे निकले,  सर्द हवा ने सुई चुभाई। खिले धूप तो लगता ऐसे,  मानो बाँटे शिवम मिठाई।      __@raushan__raaz

ज़िन्दगी

 रास्ते में आएंगी रुकावटें बहुत!! मगर तू बढ़ते जाना! रोकेगा ज़माना तुझे!! पर तू चलते जाना! जब रहेगी सामने मंज़िल तेरे!! तो रुकावटों पर नज़र भी नहीं जा पाएगी! रास्ते हो जाएंगे आसान तेरे!! जब सपनो में भी मंज़िल नज़र आएगी! यूँ जमीन पर बैठकर क्यूँ  आसमान देखता है, पँखों को खोल जमाना  सिर्फ उड़ान देखता है। उम्र थका नहीं सकती, ठोकरे गिरा नहीं सकती, अगर जिद हो जितने की तो परिस्थितिया भी हरा नहीं सकती... ज्यादातर महान लोगों को उनकी सबसे बड़ी सफलता उनकी सबसे बड़ी असफलता के बाद मिली।    ___@raushan__raaz ✔️Share & Support Us ✔️Unmute Notification

ढाई अक्षर

 काफी बरसों पहले पढा था..! पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय॥ अब पता लगा है कि, ढाई अक्षर है क्या..? तब से मन शांत हो गया..!! ढाई अक्षर के ब्रह्मा और, ढाई अक्षर की सृष्टि..! ढाई अक्षर के विष्णु और, ढाई अक्षर की लक्ष्मी..!! ढाई अक्षर की दुर्गा और, ढाई अक्षर की शक्ति..!! ढाई अक्षर की श्रद्धा और, ढाई अक्षर की भक्ति..! ढाई अक्षर का त्याग और, ढाई अक्षर का ध्यान..!! ढाई अक्षर की इच्छा और, ढाई अक्षर की तुष्टि..! ढाई अक्षर का धर्म और, ढाई अक्षर का कर्म..!! ढाई अक्षर का भाग्य और, ढाई अक्षर की व्यथा..! ढाई अक्षर का ग्रन्थ और, ढाई अक्षर का सन्त..!! ढाई अक्षर का शब्द और, ढाई अक्षर का अर्थ..! ढाई अक्षर का सत्य और, ढाई अक्षर की मिथ्या..!! ढाई अक्षर की श्रुति और, ढाई अक्षर की ध्वनि..! ढाई अक्षर की अग्नि और, ढाई अक्षर का कुण्ड..!! ढाई अक्षर का मन्त्र और, ढाई अक्षर का यन्त्र..! ढाई अक्षर की श्वांस और, ढाई अक्षर के प्राण..!! ढाई अक्षर का जन्म और, ढाई अक्षर की मृत्यु..! ढाई अक्षर की अस्थि और, ढाई अक्षर की अर्थी..!! ढाई अक्षर का प्यार और, ढाई अक्षर का युद्ध.....